फिल्म 45 रिव्यू (Kannada Movie 45 Review in Hindi)

फिल्म नाम: 45
भाषा: कन्नड़ (Kannada)
जॉनर: फैंटेसी, थ्रिलर, फिलॉसफिकल ड्रामा
स्टार कास्ट: उपेंद्र, राज बी. शेट्टी, शिवराजकुमार
रिलीज़: थिएटर (कन्नड़ भाषा)


भूमिका (Introduction)

आज के दौर में जब ज़्यादातर फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित रह जाती हैं, वहीं कन्नड़ फिल्म “45” एक अलग रास्ता चुनती है। यह फिल्म सिर्फ कहानी नहीं सुनाती, बल्कि जीवन, मृत्यु, कर्म और समय जैसे गहरे विषयों पर सवाल खड़े करती है।

अगर आप ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं जो देखने के बाद भी दिमाग में घूमती रहें, तो 45 आपके लिए एक दिलचस्प अनुभव बन सकती है।


फिल्म 45 की कहानी क्या है? (Story Overview – बिना स्पॉइलर)

फिल्म की कहानी एक आम इंसान के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार राज बी. शेट्टी निभाते हैं। अचानक उसकी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब उसे पता चलता है कि उसके पास अब सिर्फ 45 दिन बचे हैं।

यह सूचना उसे देता है एक रहस्यमयी किरदार — जिसे निभाया है उपेंद्र ने। यह किरदार प्रतीकात्मक रूप से मृत्यु का प्रतिनिधित्व करता है।

इसके बाद शुरू होती है एक ऐसी यात्रा, जहां इंसान अपने किए हुए कर्मों, गलतियों और अधूरी इच्छाओं से आमने-सामने होता है।

फिल्म में शिवराजकुमार का किरदार एक संतुलन की तरह सामने आता है — जो इंसान और मृत्यु के बीच की कड़ी बनता है।


गरुड़ पुराण और मॉडर्न सिनेमा का मेल

फिल्म 45 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी जड़ें गरुड़ पुराण जैसी प्राचीन अवधारणाओं से जुड़ी हैं, लेकिन प्रस्तुति पूरी तरह मॉडर्न है।

कर्म, दंड, समय और आत्मा जैसे विषयों को जिस तरह आज के समाज और मानसिकता से जोड़ा गया है, वही इस फिल्म को खास बनाता है।


परफॉर्मेंस एनालिसिस (Acting Review)

राज बी. शेट्टी

राज बी. शेट्टी ने एक आम इंसान के संघर्ष को बेहद ईमानदारी से निभाया है। उनकी एक्टिंग में डर, पछतावा, उलझन और इंसानियत साफ झलकती है।

उपेंद्र

उपेंद्र का किरदार फिल्म की आत्मा है। उनका स्क्रीन प्रेज़ेंस डरावना नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करता है। यह रोल शायद उन्हीं के लिए लिखा गया था।

शिवराजकुमार

शिवराजकुमार का किरदार सबसे ज़्यादा सेंसिबल और बैलेंस्ड है। वे फिल्म को भावनात्मक गहराई देते हैं और दोनों किरदारों को जोड़ने का काम करते हैं।


विजुअल्स, सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूज़िक

फिल्म का कलर टोन और विजुअल ट्रीटमेंट कहानी के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

  • सिनेमैटोग्राफी डार्क लेकिन क्लियर है
  • बैकग्राउंड म्यूज़िक हर सीन को इमोशनल वज़न देता है
  • कई जगह गूसबंप्स देने वाले सीन हैं

क्लाइमेक्स रिव्यू (Climax Without Spoiler)

फिल्म के आखिरी लगभग 30 मिनट इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

यह क्लाइमेक्स सिर्फ कहानी खत्म नहीं करता, बल्कि दर्शक को आत्ममंथन करने पर मजबूर करता है। यही वजह है कि कई दर्शकों को यह फिल्म ऑस्कर लेवल की लगती है।


क्या फिल्म 45 देखनी चाहिए? (Should You Watch 45?)

अगर आप:

  • माइंड-बेंडिंग फिल्में पसंद करते हैं
  • जीवन और मृत्यु पर बनी कहानियों में रुचि रखते हैं
  • सिर्फ मसाला नहीं, मतलब ढूंढते हैं

तो फिल्म 45 जरूर देखिए

हालांकि, अगर आप सिर्फ हल्की-फुल्की एंटरटेनमेंट वाली फिल्में देखते हैं, तो यह फिल्म आपको थोड़ी भारी लग सकती है।


फिल्म 45 रेटिंग

3.5 / 5 स्टार


निष्कर्ष (Final Verdict)

फिल्म 45 एक साहसी और अलग सोच वाली फिल्म है। यह परफॉर्मेंस, कॉन्सेप्ट और डायरेक्शन के दम पर याद रह जाती है।

यह फिल्म आपको डराने नहीं, बल्कि आपको खुद से सवाल पूछने पर मजबूर करती है — और यही इसकी सबसे बड़ी जीत है।


अगर आपको ऐसे ही डीप मूवी रिव्यू और एनालिसिस पसंद हैं, तो Nilmani Blog को फॉलो करते रहें।

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