Title: वो जानवर नहीं था! मेरे दोस्त के शरीर में जो बदलाव हुए, उसे देखकर डॉक्टर भी भाग खड़े हुए
(Introduction) दोस्तों, हम अक्सर फिल्मों में वेयरवोल्फ (Werewolf) या इंसान के जानवर बनने की कहानियाँ देखते हैं और सोचते हैं कि ये सिर्फ ग्राफ़िक्स का कमाल है। लेकिन क्या हो अगर मैं आपसे कहूँ कि प्रकृति में कुछ ऐसे वायरस या परजीवी (Parasites) मौजूद हैं जो इंसान के डीएनए को बदल सकते हैं? आज की कहानी मेरे एक दोस्त की है जो एक जंगल सफारी से वापस तो आया, लेकिन वो ‘वही’ इंसान नहीं था जो गया था। यह कहानी कमज़ोर दिल वालों के लिए नहीं है।
(Main Story) हम चार दोस्तों का ग्रुप – मैं, राहुल, सुमित और अमित – मध्य प्रदेश के एक घने जंगल में ट्रेकिंग के लिए गए थे। रात को कैंपफायर के दौरान सुमित को पैर में किसी चीज़ ने काट लिया। हमने देखा तो वहां दो छोटे दांतों के निशान थे, जैसे किसी नेल कटर से काटा गया हो। सुमित ने कहा कि मामूली खरोंच है और सो गया।
असली डरावनी कहानी घर वापस आने के दो दिन बाद शुरू हुई। सुमित को तेज़ बुखार आया। जब मैं उसे देखने उसके घर गया, तो वो अपने कमरे में अंधेरे में बैठा था। उसने मुझसे कहा, “भाई, मुझे बहुत भूख लग रही है, लेकिन खाने का स्वाद नहीं आ रहा।”
मैंने लाइट जलाई तो मेरी चीख निकल गई। सुमित की त्वचा… वो इंसान की त्वचा नहीं रही थी। उसके हाथों पर काले और सख्त बाल उग आए थे और उसके नाखून लंबे और मुड़े हुए हो गए थे, बिल्कुल किसी जंगली जानवर के पंजों की तरह। सबसे भयानक बात यह थी कि उसका जबड़ा (Jaw) अजीब तरह से बाहर की तरफ निकल रहा था।
उसने मुझे देखते हुए एक अजीब सी आवाज़ निकाली—किसी इंसान की आवाज़ नहीं, बल्कि किसी घायल जानवर की गुर्राहट। उसकी मेज़ पर कच्चा चिकन रखा था जिसे वो बिना पकाए खा रहा था।
हम उसे जबरदस्ती अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने जब उसका एक्स-रे (X-Ray) किया, तो वो सन्न रह गए। सुमित की हड्डियां मुड़ रही थीं और उसकी रीढ़ की हड्डी (Spine) लंबी हो रही थी। डॉक्टर ने डरते हुए कहा, “यह मेडिकली इम्पॉसिबल है। यह आदमी किसी दूसरी प्रजाति (Species) में बदल रहा है।”
उसी रात सुमित अस्पताल से भाग गया। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि वो दो पैरों पर नहीं, बल्कि अपने चारों हाथ-पैरों पर रेंगते हुए, दीवार फांदकर जंगल की तरफ भाग रहा था। उसकी स्पीड किसी भी एथलीट से ज्यादा थी।
(Conclusion) आज उस बात को छह महीने हो चुके हैं। सुमित अभी भी ‘लापता’ है। लेकिन कभी-कभी उस जंगल के पास रहने वाले गाँव वाले शिकायत करते हैं कि रात को एक अजीब सा जीव उनके मवेशियों को उठा ले जाता है। एक ऐसा जीव जो दिखता तो इंसान जैसा है, लेकिन शिकार जानवर की तरह करता है।
अंतिम सवाल: क्या जंगलों में आज भी कोई ऐसा श्राप या वायरस ज़िंदा है जो हमें जानवर बना सकता है? अगर आपके पास ऐसी कोई जानकारी है, तो कमेंट में जरूर बताएं।