अरावली पर्वतमाला सिर्फ पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है। यह उत्तर भारत की जीवन रेखा (Life Line of North India) है। स्कूल की किताबों में हमने पढ़ा था कि अरावली माउंटेन रेंज हजारों साल पुरानी है और यह पूरे नॉर्थ इंडिया के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
लेकिन आज वही अरावली खनन (Mining), सरकारी नीतियों और औद्योगिक लालच की वजह से खत्म होने के कगार पर खड़ी है।
यही वजह है कि आज #SaveAravali, Aravali Hills Mining, और Aravali Environmental Crisis जैसे कीवर्ड ट्रेंड कर रहे हैं।
Aravali Hills क्यों है North India के लिए इतनी ज़रूरी?
अरावली पर्वतमाला का महत्व सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि जलवायु और जीवन से जुड़ा हुआ है।
- अरावली बारिश के पैटर्न को नियंत्रित करती है
- यह लू और हीट वेव (Heat Wave) को रोकने में मदद करती है
- यह ग्राउंड वाटर रिचार्ज करती है
- यह हवा को साफ रखने वाली ऑक्सीजन बेल्ट है
अगर अरावली नहीं रही, तो गर्मी ज़्यादा होगी, बारिश कम होगी और खेती तबाह हो जाएगी।
100 मीटर की नई परिभाषा: Aravali Hills पर सबसे बड़ा हमला
हाल ही में सरकार ने अरावली की एक नई परिभाषा जारी की है।
इस परिभाषा के अनुसार:
- सिर्फ 100 मीटर या उससे ऊँचे पहाड़ ही अरावली माने जाएंगे
- 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले पहाड़ अब अरावली का हिस्सा नहीं होंगे
- ऐसे पहाड़ों को Mining और Mining Lease के लिए खोल दिया जाएगा
यह फैसला बेहद खतरनाक है क्योंकि अरावली सिर्फ ऊँचे पहाड़ों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे-छोटे पर्वतों के समूह से बनी है।
Aravali Mining: लालच बनाम पर्यावरण
अरावली क्षेत्र में भारी मात्रा में मौजूद हैं:
- Limestone (चूना पत्थर)
- Marble
- Granite
- Black Marble
इन खनिजों की कीमत अरबों में है।
लेकिन इन्हें निकालने की कीमत क्या है?
- लाखों पेड़ों की कटाई
- पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाना
- पूरे Ecosystem का विनाश
यह सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि मानव जीवन पर सीधा हमला है।
Water Cycle और Aravali: साइंस क्या कहता है?
जल चक्र (Water Cycle) के अनुसार:
- समुद्र से भाप उठती है
- बादल बनते हैं
- हवाएँ बादलों को ज़मीन की ओर लाती हैं
- पहाड़ बादलों को रोकते हैं और बारिश होती है
अरावली अगर नहीं रही, तो:
- बारिश वाले बादल उत्तर भारत से आगे निकल जाएंगे
- नॉर्थ इंडिया में सूखा पड़ेगा
- पाकिस्तान और अफगानिस्तान की ओर बारिश बढ़ेगी
यानी अरावली हटने का मतलब पूरे मानसून सिस्टम का फेल होना।
Heat Wave और Climate Change का खतरा
अरावली उत्तर-पश्चिम से आने वाली गर्म हवाओं को रोकती है।
अगर यह ढाल खत्म हो गई, तो:
- Heat Wave और ज़्यादा खतरनाक होगी
- Delhi, Haryana, Rajasthan में तापमान और बढ़ेगा
- रहने लायक हालात खत्म हो जाएंगे
यह सीधा Climate Change India से जुड़ा हुआ मामला है।
Aravali बचाओ आंदोलन: जनता अब चुप नहीं
आज हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-NCR में लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं।
- पंचायतें हो रही हैं
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं
- बुज़ुर्ग महिलाएं तक चेतावनी दे रही हैं
लोग समझ चुके हैं कि Aravali Hills सिर्फ पहाड़ नहीं, जीवन है।
Celebrities और नेताओं की प्रतिक्रिया
कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है:
- “100 मीटर से नीचे का पहाड़ भी अरावली है”
- “जल, जंगल और जमीन के बिना विकास बेमानी है”
- “अगर आज नहीं बोले, तो आने वाली पीढ़ियाँ सवाल करेंगी”
यह लड़ाई अब Political नहीं, Existential बन चुकी है।
Aravali को बचाना क्यों हमारा फर्ज़ है?
अरावली को बचाना मतलब:
- साफ हवा बचाना
- पानी बचाना
- खेती बचाना
- आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना
अगर आज मुनाफे के लिए पहाड़ काट दिए गए, तो कल पैसा भी किसी काम का नहीं रहेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
Aravali Hills का विनाश सिर्फ पर्यावरण का नुकसान नहीं है, यह उत्तर भारत की रीढ़ तोड़ने जैसा है।
यह वक्त है चुप रहने का नहीं, सवाल पूछने का।
जब भविष्य हमसे पूछेगा—
“जब प्रकृति बर्बाद हो रही थी, तब तुम क्या कर रहे थे?”
तो हमारे पास जवाब होना चाहिए।