Title: हाईवे का वो मशहूर ढाबा: जहाँ का ‘स्पेशल नॉन-वेज’ खाने के बाद लोग गायब हो जाते हैं
(Introduction) भारत के हाईवे अपनी डरावनी कहानियों के लिए मशहूर हैं। कभी चुड़ैल, तो कभी लुटेरे। लेकिन सबसे डरावना अनुभव वो होता है जब डर किसी भूत से नहीं, बल्कि एक ज़िंदा इंसान से लगे। क्या आप जानते हैं कि आप जो बाहर खाना खा रहे हैं, वो असल में क्या है? यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जो एक गलत ढाबे पर रुका और फिर कभी घर नहीं पहुँचा।
(Main Story) यह घटना दिल्ली-मुंबई हाईवे के एक सुनसान हिस्से की है। वर्मा जी अपने परिवार के साथ कार से जा रहे थे। रात के 11 बज चुके थे और सबको बहुत भूख लगी थी। उन्हें सड़क किनारे एक पुराना ढाबा दिखाई दिया जिस पर लिखा था—”बाबा का शुद्ध मांसाहारी भोजन”। अजीब बात यह थी कि आसपास मीलों तक कोई आबादी नहीं थी, फिर भी ढाबे से बहुत खुशबू आ रही थी।
वर्मा जी, उनकी पत्नी और दो बच्चे वहां खाना खाने बैठे। ढाबे का मालिक एक बहुत ही अजीब हुलिए वाला आदमी था, जिसने लाल कपड़े पहने थे और माथे पर राख लगा रखी थी। उन्होंने ‘स्पेशल मटन करी’ ऑर्डर की।
बच्चों ने खाते हुए कहा, “पापा, इसका स्वाद बहुत अलग है, थोड़ा मीठा है।” वर्मा जी को भी लगा कि मांस बहुत ज्यादा नरम है। लेकिन भूख की वजह से उन्होंने ध्यान नहीं दिया।
तभी वर्मा जी की पत्नी की प्लेट में कुछ कड़क चीज़ आई। उन्हें लगा कि हड्डी होगी। जब उन्होंने उसे मुँह से निकालकर देखा, तो उनकी आवाज़ गले में ही अटक गई। वो हड्डी नहीं थी… वो एक इंसानी उंगली का नाखून था, जिस पर नेल पॉलिश लगी हुई थी।
हड़कंप मच गया। वर्मा जी तुरंत उठे और किचन की तरफ भागे। किचन का दरवाज़ा आधा खुला था। वहां का नज़ारा देखकर उनके होश उड़ गए। वहां कोई बकरा या मुर्गा नहीं टंगा था। वहां एक कोने में इंसानों के कपड़े और गहने पड़े थे और एक बड़े से भगोने में… (मैं यहाँ विस्तार से नहीं लिखूंगा)… कुछ ऐसा उबल रहा था जिसे देखकर वर्मा जी को उल्टी आ गई।
वो लोग समझ गए कि यह कोई ढाबा नहीं, बल्कि किसी ‘अघोरी पंथ’ या नरभक्षियों (Cannibals) का अड्डा है जो राहगीरों को अपना शिकार बनाते हैं। वो अपनी कार की तरफ भागे, लेकिन उनकी कार के टायर पंक्चर कर दिए गए थे। अंधेरे में ढाबे के पीछे से 10-12 लोग हाथों में बड़े चाकू लेकर निकल आए।
(Conclusion) पुलिस को बाद में वर्मा जी की कार उस ढाबे से 50 किलोमीटर दूर एक खाई में मिली। कार खाली थी। पुलिस ने उस ढाबे पर छापा मारा, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। सिर्फ किचन में जमीन के नीचे दबी हुई सैकड़ों इंसानी हड्डियां मिलीं।
चेतावनी: अगली बार जब आप किसी सुनसान हाईवे पर किसी अनजान ढाबे पर रुकें, और खाने का स्वाद कुछ ‘ज़्यादा ही अलग’ लगे… तो खाना वहीं छोड़ दीजियेगा। हो सकता है आप ‘मेन्यू’ देख रहे हों, और कोई आपको ‘मेन्यू’ बना रहा हो।