(Experiments & Eldritch)

Title: वो अस्पताल जहाँ मरे हुए मरीज़ दोबारा ज़िंदा हो जाते थे – स्लीप एक्सपेरिमेंट का खौफनाक सच

(Introduction) विज्ञान ने इंसान को चाँद तक पहुँचा दिया है, लेकिन विज्ञान के इतिहास में कुछ ऐसे काले पन्ने भी हैं जिन्हें जला दिया गया। ‘रसियन स्लीप एक्सपेरिमेंट’ (Russian Sleep Experiment) के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन भारत में भी 1980 के दशक में एक ऐसा ही गुप्त प्रयोग हुआ था, जिसका मकसद था—इंसान की नींद को खत्म करना। नतीजा? तबाही।

(Main Story) यह कहानी एक रिटायर्ड कंपाउंडर की डायरी से मिली है। शहर के एक पुराने, बंद हो चुके मानसिक अस्पताल के तहखाने में एक सीक्रेट लैब थी। वहां 5 कैदियों को एक ऑफर दिया गया—अगर वे 30 दिनों तक बिना सोए रह सकते हैं, तो उन्हें आज़ाद कर दिया जाएगा।

कमरे में एक खास तरह की गैस छोड़ी गई जो उन्हें सोने नहीं देती थी। पहले 5 दिन सब सामान्य रहा। कैदी बातें करते रहे। लेकिन 9वें दिन के बाद, उनमें से एक ने चिल्लाना शुरू किया। वो इतना तेज़ चिल्लाया कि उसके गले की नसें फट गईं और वो गूंगा हो गया। अजीब बात यह थी कि बाकी कैदियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

15वें दिन, कमरे के अंदर से आवाज़ें आनी बंद हो गईं। वैज्ञानिकों को लगा कि शायद सब मर गए हैं। उन्होंने माइक्रोफोन पर कहा, “हम अंदर आ रहे हैं, कोई हरकत मत करना।” अंदर से एक बहुत ही धीमी और डरावनी आवाज़ आई: “हम अब आज़ाद होना नहीं चाहते।”

जब वैज्ञानिकों ने दरवाज़ा खोला, तो वो उल्टी करते हुए बाहर भागे। अंदर का नज़ारा नरक से बदतर था। कैदियों ने एक-दूसरे को नहीं, बल्कि खुद को खाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपनी छाती फाड़ ली थी और उनके अंग बाहर लटक रहे थे, लेकिन वे ज़िंदा थे और मुस्कुरा रहे थे।

जब उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इतनी ताकत से हमला किया कि एक सैनिक का गला काट दिया। वो चिल्ला रहे थे, “गैस… हमें गैस चाहिए… हमें सोना नहीं है।”

जैसे ही उन्हें सुलाने की कोशिश की गई (एनेस्थीसिया देकर), उनकी मौत हो गई। मरने से पहले आखिरी कैदी से डॉक्टर ने पूछा, “तुम लोग क्या हो?” उसने अपनी फटी हुई आँखों से डॉक्टर को देखा और मुस्कुराते हुए कहा: “हम तुम्हारे दिमाग का वो कोना हैं जिसे तुम सोने के बाद दबा देते हो। हम तुम्हारा पागलपन हैं।”

(Conclusion) उस अस्पताल को बाद में आग लगाकर बंद कर दिया गया और सारे रिकॉर्ड्स मिटा दिए गए। लेकिन कहते हैं कि आज भी उस खंडहर के पास से गुज़रने पर रात को किसी के चीखने और हंसने की आवाज़ें एक साथ सुनाई देती हैं।

सोचिये: नींद सिर्फ आराम नहीं है, यह हमें हमारे अंदर के जानवर से बचाकर रखती है। अगर आप हमेशा के लिए जाग गए, तो क्या आप ‘इंसान’ रह पाएंगे?

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